हम अपने कार्यों को सही दिशा देने के लिए किसी ज्योतिषी या तथा कथित संतों की ओर देखते हैं परन्तु अपने आस पास के लोगों पर हमारी निगाहें क्यों नहीं जाती ,जबकि वे ज्यादा निस्वार्थ भाव से समाज की और देश की सेवा में सलंग्न है। हम लगभग रोज़ ही अख़बार में पढ़ते हैं कि कितने ही लोग बिना किसी तत्कालिक स्वार्थ के जंगलों और पर्यावरण की रक्षा के लिए जूझ रहें है और समाज के ठेकेदारों और उनके द्वारा खरीदे हुए प्रशासनिक तंत्र से भी संघर्ष करते हुए जंगलों और नदी नालों और पोखरों की रक्षा कर रहे हैं। इन्ही में से एक नाम झारखण्ड के सुदूर गाँव की लेडी टार्ज़न जमुना दुदू का भी है। उन्होंने अपनी सक्रियता और अपने गाँव के महिलाओ की सहायता से कुछ ही वर्षों में ५० एकर भूमि में जंगलों का नया विस्तार किया है। जमुना दुदू के जज्बे और उनके ग्रामवासियों के सहयोग को हमें प्रणाम करना चाहिए और इन तथा कथित मठाधीशों का तिरस्कार करना चाहिए। जो पैसा और चढ़ावा हम इन्हें दे आते है ,वो पैसा हम अपने आस पास के पर्यावरण को सुधारने और सवारने में लगा कर आर्थिक रूप से भी स्वावलंबी हो सकते हैं।
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