Sunday, 26 October 2025

 Dear citizen of Gorakhpur ,

As we are aware and feeling proud for our own city , which has won a certificate of cleanliness in country wide survey. But one thing we miss that there are piles of garbage every where in the city and we the proud citizen of Gorakhpur  don't hesitate to spit any where in our public location or throw our garbage at any place without taking pain of segregating it . Last week I made a visit to city's new prime location Chatori gali in Golghar . Government has made this place so beautiful and clean with granite benches and clean stoned pathway with dustbins and public toilet . But there were huge amount of leftover by people on benches . Spitting of Gutkha and pan every where . What we are doing with our city and state, and what image we are creating about ourselves . This place is only a sample , you may see these type of example everywhere at public places . We are so uncivilised that we can't take care of our things and places . We can't afford these type of facilities in our city .

Our court's campuses are also an example of this type of garbage , you can say that whole campus is a large block of garbage in itself . Judges and District Judge himself go through these ways daily but their big air condition  don't allow them to see through windows . 

What we can do that , we should don't spread our own garbage  open area . Some little effort will make this city clean and clear after some time .
















































































Monday, 15 June 2020

Unimaginable situation of connectivity in our seven sister state

In special Ground Zero page of The Hindu of 13/6/2020 , there was an article written by Mr. Rahul Karmakar with heading{ Fainting signals from distant tower} . After reading that article from top to bottom I came to knew that such type of connectivity problem is there that persons have to walk for 7 lengthy hours to make a landline call provided if that landline is working properly and that proper govt office is open . 
After celebrating so much Independence days and Republic days where are we ? What our governments have done in long 73 years in area which is so much important for our country in a war like situations .
I personally feel that all governments have explored that area only for votes and natural resources and they forgot essential necessities of life in which communication has also great share specially in modern global village format of world .
In this pandemic period of COVID 19 , communication and internet availability had occurred more and more importance in online classes , video chatting and frequent calling to our kith and kin , where are they . But situation in like seven sisters we are having it is next to impossible to have these services . 
In our planes we have big telecom giants Reliance Jio , Airtel ,Idea and Vodafone who are playing MNP game with heavy malfunctioning and lucrative policies for public of planes but they are not thinking about their north eastern brothers and sisters . .
I want to request deeply to all these telecom giants and governments of center and states that please think about this harsh situation and do some thing about this huge population and grab their customers .

Thursday, 2 November 2017

POLICE STATIONS OF GORAKHPUR DETERIORATING VEHICLE IN AND OUT OF THEIR PREMISES

When ever you visit in Gorakhpur and if pass through a police station you can see a large no . of two , three and four wheeler vehicles in and out of the premises in odd situation getting rust and dust on their fine bodies . These are the vehicles which are checked by any police team from time to time engulfed in some type of illegal activity or accident or with illegal and inadequate papers .
These papers are used  to be produce in front of court and court give proper order in that reference and vehicle get released after some time . But in some cases as I feel that owner don't produce them selves in front of court and let their vehicles to be rotten at same place.
But this is not my concern , my concern is to solve that problem for traffic and dirt problem at police stations. I suggest police team of UP or any other state where this type of problem persists , they should get final order either from court or from their Head of Departments to auction these unclaimed vehicles after a distinct time period and use this money in restoration of station building and increase some better facilities for their own staff .
This will be a very huge amount if approval is achieved and process is followed honestly and all the police stations will be well accomplished in all means .

Monday, 7 August 2017

Chief Minister Yogi ji and his own city

माननीय
योगी आदित्य नाथ जी गोरखपुर सदर के ०५  बार साँसद रहे है और अब मुख्यमंत्री भी है , परन्तु उनके इतने लम्बे संसदीय कार्यकाल ,  अब मुख्यमंत्रित्व काल में भी गोरखपुर सदर या जिसे नगर क्षेत्र भी कहा जा सकता है , उसमे कोई मूलभूत बदलाव नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री बनते ही उनकी सरकार ने पहला वादा किया कि हम १५ जून तक प्रदेश की सभी सड़को को गड्ढा मुक्त कर देंगे , काम शुरू हुआ और जल्द सार्वजनिक निर्माण विभाग ने हाथ खड़े कर दिए कि उनके पास संसाधन ही नहीं है , और काम बंद हो गया।  थोड़ा सी बारिश में ही शहर को अपने सड़को और नालियों की औकात पता चल गयी। वो तो भला हो भगवान् का कि , बारिश ही रुक गयी और नालियों ने बढ़ना छोड़ दिया वर्ना पता नहीं क्या दशा होती। नगर निगम के कार्यालय के ठीक सामने पार्षद श्री मनीष सिंह का आवास  है
जिसके सामने की नालियों में न जाने कितना कूड़ा है की सारी नालियों का गन्दा पानी सड़क पर है और वहां से दुकानों में घुस कर नर्क जैसा माहौल पैदा हो गया है।
योगी जी ने सांसद रहते हुए बहुत से गावों को गोद लिया था , जंगल औराही भी उनमे से एक है , वहां की सड़को पर पता ही नहीं चलता है कि आप नाली में जा रहे है या सड़क पर है। सारे सड़के बुरी तरह से टूटी है ,और सरकार मेट्रो की परियोजना पर काम करते हुए दिख रही है।  रोज़ अख़बारों में सूचना आ रही है कि यहां डिपो बनेगा वहाँ लाइन बनेगी परन्तु शहर कि चिंता नहीं कि केवल सड़के और नालियां ही ठीक रहे तो जनता आशीर्वाद देते देते थक जाएगी  नगर के वायुपत्तन के एक मात्र मार्ग में रेलवे का नंदानगर  ढाला पड़ता है जिसके  बंद होने के कारण अमूमन लोगो की उड़ाने छूट जाती है और जो लोग  शहर से आते और जाते है उनके लिए भी ढाला एक बड़ा सरदर्द और काम रुकने का कारण है। जनता को वहां तुरंत एक ओवर ब्रिज की आवश्यकता है और वहां इसके लिए पर्याप्त जगह भी है।
मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वहां पर एक ओवरब्रिज अतिशीघ्र बनवाने की कृपा करे , और साथ ही साथ केवल सड़को को सीमेंट से बनवाना प्रारम्भ करवा दे।
सड़को को जीवनकाल भी बढ़ जाएगा , जब लोग सुविधा पूर्वक आना जाना शुरू कर देंगे तो उनको मेट्रो की याद भी नहीं आएगी और सरकार को कई हज़ार करोड़ रुपये बच जायेंगे।
  इस शहर के ज़िम्मेदार नागरिकों से भी अपेक्षा है कि सड़को को कम तोड़े। प्लास्टिक का कम  प्रयोग करे  नालियों से अतिक्रमण न करें। लेकिन यहाँ के नागरिक आये दिन किसी न किसी मंदिर या तीर्थ स्थान पर बड़ा भंडारा करके गरीबों को भोजन कराते है और थर्मोकोल के प्लेट्स का सारा कचरा नालियों में भरने के लिए छोड़ देते है।
इसलिए  आप से यह भी निवेदन है कि थर्मोकोल के प्लेट और गिलास एवं प्लास्टिक के लिफाफों पर शक्ति से प्रतिबन्ध लगाए को क्योंकि लोकतंत्र में जनता प्रतिबन्ध की ही भाषा समझती है।  यद्यपि उसका भी बहुत विरोध होगा और तमाम नेता अपनी तुच्छ नेतागिरी चमकाने के लिए उनका नेतृत्व करना प्रारम्भ कर देंगे। किन्तु जब एक बार नालियों का सारा प्लास्टिक निकल आएगा और नया प्लास्टिक न आने से कचरा कम होगा तो जनता भी उसको स्वीकार कर लेगी और सभी लोग झोला लेकर निकलने के अभ्यस्त हो जायेंगे।
देश कई राज्यों में प्लास्टिक प्रतिबंधित है , और जबकि वहाँ न तो सरकार बहुमत में है और न ही आप जैसा कोई शक्तिशाली मुख्यमंत्री है , जिसकी बात सभी सुने और समर्थन करे।
जनता चाहती है कि सब कार्य समुचित तरीके से हो , शहर में सफाई रहे , नालियों में कचरा न रहे ,गालिया साफ़ रहे ,परन्तु हम  अपने घर का कचरा दूसरे के खाली प्लाट या मकान में डाल कर खुद को सफाई पसंद मान लेते है और सरकार की बुराई शुरू कर देते है।  शहर में ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के सामने , शाहपुर कॉलोनी में , मिर्ज़ापुर बंधे पर, हठी माई मंदिर के सामने , महेवा सब्ज़ी मंडी में कूड़े का भयानक अम्बार है। ये सब अम्बार जनता की भयानक भूल और सरकार के उपेक्षा का नतीजा है। जिसका दुष्परिणाम हम सभी विभिन्न भयंकर बीमारियों के रूप में भुगत रहे हैं।
अंत में निवेदन है कि गोरखपुर नगर ,  गोरखनाथ मंदिर और योगी जी  लोग एक दूसरे का पर्यायवाची मानते है , और ये चर्चा पूरी दुनिया में है , इसलिए इस शहर की गरिमा को उन्नत करने और  बनाये रखने के लिए हम सभी नागरिकों और आप को दुस्तर प्रयास करने होगा।



Sunday, 1 January 2017

Bakhira taal , migrating birds and dummping of garbage

आज मैं पूरे परिवार के साथ संत कबीर नगर ज़िले में स्थित बखिरा नामक कसबे में बखिरा नाम के विशाल ताल को देखने गया था। इस ताल के विषय में प्रसिद्ध है कि यहाँ साइबेरिया से प्रवासी पक्षी हर वर्ष शीत ऋतु में बड़ी संख्या में आते है और पूरे  शीत ऋतु में पूरे इलाके की शोभा बढ़ाते है। किन्तु वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस ओर से पूरी तरह उदासीन है। वहां जाने पर ज्ञात हुआ कि वहां पर एक कार्यालय स्थापित है जो कि वन विभाग , सोहगीबरवा द्वारा संचालित है परंतु वो कार्यालय केवल सैलानियों से ३० रुपये लेकर एक पुरानी सी नाव पर एक छोटी दूरी के जल विहार के लिए ही है। पूरे कार्यालय , अथवा पूरे क्षेत्र में कही भी पेय जल और शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है।  जनता खुले में ही प्राकृतिक दबाव को शमन करने के लिए भी मज़बूर है और कोई भी कर्मचारी सहयोग के लिए उपस्थित नहीं है।
नाविक से ही पता चला कि यहाँ के सांसद श्री शरद त्रिपाठी कभी भी यहाँ नहीं आये और नही ही कभी भी यहाँ की सुध नहीं ली। पूरे ताल के बड़े हिस्से में भयानक गंदगी फैलायी गयी जो कि संभवतः सैलानियों का ही चमत्कार है। इस गन्दगी से उस हिस्से में भयानक सड़ांध है और कीचड है।  १०० मीटर के बाद ताल का साफ़ पानी दिखाई देता है, जिसमे जलीय जंतु और वनस्पतियों का अच्छा विस्तार है और पक्षियों के भोजन के काम आता है।  यदि हमारे आदरणीय सांसद जी उस स्थान का अवलोकन कर के सही मात्रा में नागरिक सुविधाएं उपलब्ध करा सके जिसमे मुख्य सड़क से वहां तक जाने का कच्चा रास्ता का विस्तार और नवीनी करण भी सम्मिलित है।  ताल की नियमित सफाई और सैलानियों पर नियंत्रण कर सके तो ताल लखनऊ के गोमती तट या वाराणसी के घाटों की भांति स्वच्छ और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हो जायेगा और पूरे क्षेत्र का विकास उसके साथ ही हो जायेगा। भारी मात्रा में रोज़गार का भी सृजन भी होगा क्योंकि हर काम के लिए आदमी चाहिए होंगे और पर्यटन के विस्तार से उनको पैसा देने में भी आसानी होगी।
पक्षियों को भोजन और साफ़ जल मिलेगा तो वे भी अधिक संख्या में वहां आएंगे और अधिक संख्या में वहां ठहरेंगे।
नौकायन केंद्र का विस्तार और कुछ नयी नौकाएं भी आवश्यक है और  साथ सैलानियों को भी समझना होगा कि गन्दगी और सड़ांध फैला कर हम अपना ही अपमान कर रहें है साथ ही लंबे समय के लिए भविष्य को ख़राब कर रहे है।  यदि हम अपने ऊपर नियंत्रण कर के सरकार द्वारा दी गयी सुविधाओं का सही ढंग से प्रयोग करे तो सुविधाएँ लंबे समय के लिए हमारे काम आएंगी और सही प्रचार से विदेशी सैलानी भी आ सकते है।  जिससे पूरे क्षेत्र की और जनता की सूरत बदल जाएगी

Sunday, 18 September 2016

Pain in my heart after reading ' Kitne Pakistan'

आज दिनांक १८/०९/२०१६ को मैंने अपनी बहुप्रतीक्षित , प्रिय पुस्तक कमलेश्वर जी  रचित "कितने पाकिस्तान " पढ़ कर समाप्त की है , और उसको पढ़ने के बाद मुझे प्रतीत होता है कि शायद इतनी बढ़िया और विस्तृत विचारों के जो कि  दुनिया के हर हिस्से और हर सदी और समय के हर व्यक्ति और हर घटना का विस्तृत वर्णन और विश्लेषण किसी और पुस्तक में हो , मैंने पढी हो।
कमलेश्वर जी ने आदिकाल से लेकर बांग्लादेश तक के युद्ध तक जितनी भी घटनाए  हुई हैं और उसके लिए जिम्मेदार लोगों और परिस्थितयों को अपने अदालत में बुलाकर जिस तरह जिरह की और वक्त , तहज़ीब , नदी पहाड़ , किसी को भी नहीं छोड़ा और बीच -बीच में अपने वर्तमान की कहानियों के साथ  भी बेहतरीन न्याय किया है.
उन्होंने अपने विश्लेषण में यह भी सिद्ध किया कि हर व्यक्ति के मन में विभाजन कारी शक्तियां सुप्त या जागृत अवस्था में स्थित रहती है , और अवसर पाने पर अपना कार्य कर जातीं है।  इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लगा कि उस दौर के लोगों ने क्या -क्या झेला और आज भी बर्दाश्त कर रहे है।
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद प्रतीत हो रहा है कि , हर व्यक्ति और समाज को इस पुस्तक को बार बार पढ़ना चाहिए , जिससे हम अपना विश्लेषण स्वयं कर सके और समाज में शांति रहे।
धन्यवाद