Thursday, 28 November 2013

मैंने आज मुनव्वर राणा के बारे में और उनके माँ कविता की कुछ पंक्तियाँ पढ़ी और समझने की कोशिश की , सारे कविता में इसी बात पर स्थिर रहते हैं कि माँ की भावनाओं को कोई समझना नहीं चाहता है जबकि माँ अपने नालायक या लायक सारे बेटों का एक साथ ध्यान रखती है  , परंतु बंटवारे के समय उसी माँ का लोग बंटवारा करने लगते है जिसने खाने से पहले सारे बच्चो को खिलाया बाद में बचा खुचा खुद खाया या नहीं खाया , ये कोई बच्चा देखने भी नहीं जाता है।  एक माँ अपने दस बच्चो को पाल लेती है परन्तु दस बच्चे माँ के दिनों का बंटवारा कर लेते है।
आज कान्वेंट स्कूलो में पढ़ने वाले बच्चे केवल ये समझते हैं कि माँ केवल ड्रेस प्रेस करने , जूते साफ करने वाली और टिफिन बनाने वाली नौकर है और कभी कभी जो स्वादिष्ट व्यंजन बनाती है , अगर वो किसी कारन से रविवार को अन्य छुट्टी के दिनों में नहीं बना पाती है तो उसको ये अहसास कराने से भी नहीं चूकते है कि आप कोई काम नहीं करती है।  अगर माँ कम पढ़ी लिखी है या हिंदी माध्यम से पढ़ी है तो अंग्रेजी समाचार पत्र पढ़ने पर बच्चे ये पूछने से नहीं चूकते है कि माँ आप को ये समझ में आ रहा कि नहीं।  उस समय वे एकदम भूल जाते है कि उसी माँ या दादी ने उनको पहली बार हिंदी , अंग्रेजी , गणित के पहले पायदान से परिचय कराया था, अगर वो माएं पहली शिक्षा नहीं देती तो विद्यालय  में वो पहला पाठ कैसे पढ़ पाते।
कभी किसी पुरानी कहानी में मैंने पढ़ा था कि बेटा जितना भी बड़ा ज्ञानी , कवि या संगीतकार या कुछ भी बड़ा
ओहदा पाले माँ को वही अपना पुराना बच्चा ही चाहिए होता है।  जो बच्चा केवल बड़ा हो जाता है , उसके होने या न होने का कोई अर्थ नहीं है।

Wednesday, 27 November 2013

Relation ship between India and Iran and other countries

Why India should watch and wait for the decision and directives of America and other countries ? We are friends for the long time and had close relationship between us. We had a common history since a long period when there were no signs of these so called developed  nations who keep their hungry eyes on natural resources of developing and under developed countries. When we would see the history of development of these countries we can find the long case history of excavation and mining of ores and petroleum and other resources . For these purpose they made a commune and destroyed their cultural background too. In fact they first attacked on their cultures and then their resources. In way of fulfilling their needs they searched the new and raw states whether it is south hemisphere or north ,  whether it is Africa or Argentina or Peru.
We the Indian are amazed or some how we can say habitual of these and pro-west like our government that we can not think about our great cultural relations with Pershia (old Iran) and Mesopotamia(old Iraq) , which was old warm till a long time , when they and we both use to see through lenses provided by western countries and forgot ourselves and business and cultural enthusiasm which was shared one to one human in both the countries.
Now we are directed by the sanctions imposed by those western nations who want to govern the whole scenario in their own interest.
That is enough for today and rest on next meet
we as Indian

ईरान और भारत के सम्बन्ध के बारे में चर्चा करने के से पहले हमें ये सोचना होगा कि हमारे रिश्ते तय करने के लिए हमसाथ  अमेरिका और अन्य देशों के निर्देशों का इंतज़ार क्यों करते हैं ? जबकि भारत और ईरान या पुराने समय के पर्शिया से  आदिकाल से रिश्ते है और हमारा साझा इतिहास भी रहा है जिसमे हमने   अपने  सुख दुःख   साथ  साथ भोगे है और हजारों वर्षों ,तक साथ













 

Tuesday, 26 November 2013

IRAN , USA and WE

भारत के  राजनीतिक एवं कूटनीतिक कौशल का निरंतर ह्रास हो रहा है , हमारे प्रधान मंत्री की आवाज़ किसी भी भाषण और सेमिनार में सुनाई नहीं देती है।  वे इतना धीरे और अतिरिक्त सावधानी का प्रयोग करते है कि
अन्य देश के प्रतिनिधि उसको गम्भीरता से नहीं सुनते है या प्रतिक्रिया देते है।  अमरीका के ईरान सम्बंधित प्रतिबंधो से घबरा कर हमने ईरान से व्यापारिक  सम्बन्ध   स्थगित कर दिया और अमरीका   अब अपने व्यापारिक हित के लिए रूस , चीन और फ्रांस के साथ गठजोड़ बना कर ईरान से समझौता करने को तैयार है , इस कार्य के लिए न ही उसने अपने पुराने परम मित्र इजराइल से पूछा और न ही अपने नए सहयोगी भारत से सलाह ली। अब वह भारत पर कूटनीतिक दबाब बनाएगा कि हम भी ईरान से व्यापारिक समझौता करे.
कोई भी राष्ट्र अगर अपनी बात को अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर सही ढंग से और ज़ोरदार ढंग से नहीं रखेगा उसको दबाब में ही समझौता करना पड़ेगा। 

 

Thursday, 7 November 2013


आज भैया दूज और दीपावली और की छुट्टियाँ समाप्त हो गयी और