Saturday, 28 December 2013

आज दिनांक २८/१२/२०१३ को , जबकि  २०१३ अपने विविध घटनाक्रमों और सवालों के साथ समाप्त होने की ओर अग्रसर है , कुछ ऐसी भी घटनाये घटी कि जिसने हमारे देश का नाम कहीं ऊँचा किया और कहीं शर्म से डुबो दिया , वर्ष की सब घटनाओं के उपरांत हमारे राजनयिक देवयानी खोब्रागडे जी की गिरफ़्तारी और बेहद अपमानजनक ढंग से उनकी तलाशी और जेल में खतरनाक और जरायमपेशा कैदियों के साथ रखने की घटनाओं ने हमारे सरकार और उनके तथाकथित कूटनीतिक कौशल की बुरी तरह पोल खोली है , हमारी सरकार और उनकी बेताज महिला मुखिया के लिए ये एक अत्यंत ही शर्मनाक घटना है।  हमारी सरकार हमेशा ये गीत गाती है कि अमेरिका के साथ हमारे द्विपक्षीय सम्बन्ध बिलकुल बराबर के है , ये केवल एक कोरी गप है।  सारे देश की जनता ने अनुभव कर लिया कि हमारी सरकार जब अपने एक उत्कृष्ट सेवा में लगे हुए राजनयिक को नहीं सम्मान दिला पायी तो आम कामगार नागरिको का क्या हश्र होता होगा , जो विभिन्न देशों में अपने परिवार को पालने के लिए कठिन श्रम करते है और बेइज्जती भी बर्दाश्त करते है।
देश के कुशल नीतिकार जो करते है वो तो हम देख ही रहे है , परन्तु देश की कुछ पार्टियों के नेताओं ने इससे भी निन्दनीय कार्य किया , बसपा की प्रमुख ने उनके जाति विशेष पर प्रकाश डाला जिसका राजनयिक की काबिलियत और उनके चयन में कोई स्थान नहीं था , और एक दूसरे पार्टी के सम्मानित नेता ने कह डाला कि वे देवयानी जी को रामपुर से संसदीय चुनाव लड़ाने को तैयार है।
माननीय आज़म खान जी अपनी बेइज्जती को लग रहा है कि भूल गए जो अमेरिका ने अपने विमान पत्तन पर ही कर दी थी।
आज माननीय अरुण जेटली जी का बयान उत्साह वर्धक था कि हमें नरेंद्र मोदी जी के लिए अमेरिकी वीजा की मांग नहीं करना चाहिए और अपने देश पर ही ध्यान देना चाहिए और उन्हें अपने वीजा नीतियों की समीक्षा के  लिए समय देना चाहिए
मायावती जी को देवयानी जी के बारे में विचार आये , ये एक अच्छी बात है किन्तु वे एक विशिष्ट सेवा में
नागरिक के स्थान पर अपने समाज की सारी नारियो की स्थिति सुधार ले तो वही श्रेयस्कर होगा और आज़म खान जी के बारे में विचार प्रकट करना बुद्धिमानी नहीं होगी।

Friday, 13 December 2013

आज कल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों के मानसिक संतुलन पर अरविन्द और उनके आप का भय सर चढ़ कर बोल रहा है , इसी कारण कभी विदेश मंत्री कांग्रेस अध्यक्ष को राहुल की माँ के साथ अपनी माँ और फिर सारे देश की माँ बताते है , कभी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल सारे महत्वपूर्ण कार्यो को छोड़ कर समलैंगिकता पर बहस में लग जाते हैं , जबकि कल ही न्यायालय ने इसे गैर कानूनी और असंवैधानिक और साथ ही देश के सामाजिक संरचना के विरुद्ध बताया है, वैसे भी अदालत कहे या न कहे समलैंगिकता हमारे समाज के मान्यताओं में कहीं भी सम्मिलित नहीं है।  राहुल को चाहिए कि अब वे अपने लोक सभा क्षेत्र पर ध्यान दे और अपनी माँ के स्वास्थय और लोक सभा क्षेत्र पर निगाह रखे जिससे वो भी सीट कोई कब्ज़ा न कर ले।  देश में विचार करने लायक बहुत सारी परेशानिया और पेचीदिगियां है।  उन पर चिंतन कर करके सही विचार रखना चाहिए। सलमान खुर्शीद ने चापलूसी की पराकाष्ठा पर कर ली है ,जिससे हो सकता है कि आगे के बचे कार्यकाल में उनको कोई और पद भी मिल जाये और वे कुछ अपना अतिरिक्त भला कर सके।  अन्यथा विदेश मंत्री स्तर के पास अनगिनत समस्याए और काम होते है , और सारे विश्व के कारगुजारियों और घटनाओं पर पैनी नज़र रखनी होती है , जो कार्य इस समय एकदम नहीं होता प्रतीत होता है।  हमारे देश की कोई बात या घटना पर कोई ध्यान नहीं देता है। सारे देश के भीतर जासूसों का जाल बिछा जिसके बारे में अमेरिका स्वयं  स्वीकार कर रहा है।  सारे देश के आम से लेकर खास व्यक्तियों तक कि सारी सूचनाये जा रही है।
इस लिए सारे आम आदमियो की ओर से मेरी कांग्रेस पार्टी और सरकार से अनुरोध है कि वे अपने मूल काम पर ही चिंतन करे और न्यायालय और माँ के मुद्दे छोड़ दे , जनता स्वयं तय कर लेगी।

Thursday, 5 December 2013

कल मैं अपने निजी कार्यों से विश्व  प्रसिद्ध वाराणसी गया , जो कि देवादिदेव महादेव  का प्रिय नगर भी है ,
और आज भी वहाँ के निवासी इस बात पर गर्व करते हैं कि ये भोलेनाथ की नगरी है और बाबा के त्रिशूल पर ही बसा है।
किन्तु आज इस शहर की दयनीय स्थिति देख कर लगता है कि ,  शायद महादेव ये नगर भूल गए या लोग ये भूल गए कि कभी ये महादेव का ही नगर था , इतनी भयानक गन्दगी और खौफ नाक सड़के देख कर लगता है कि या तो प्रशासन यहाँ है ही नहीं या सोता हुआ एक भयानक सा राक्षस है जिसे लोगों से कर वसूलना तो याद है , परन्तु ये भूल गया कि उसका कोई दायित्व भी है।  सारे रास्तों और चौराहों और नालियों में भयानक गन्दगी जमा है , सारी सड़के और गलियां बुरी तरह टूटी हुई है।  सड़क पर कोई लगातार एक घंटा भी दोपहिया या रिक्शॉ से चलता रहे तो एक सप्ताह में ही उसके अस्थि तंत्र विकृत हो जायेगा और वो डॉक्टर क साथ ही समय बितायेगा और अपनी मेहनत की सारी कमाई उसको ही समर्पित कर देगा।
यही हाल यहाँ गंगा घाटों और उनके किनारे स्थित मंदिरों की भी दुर्दशा भी विचारणीय है। सारे मंदिरों में महंतों का ही कब्ज़ा है , जो काशी कभी संतों के लिए विख्यात थी वहाँ केवल महंतो और लुटेरो का ही बोल बाल है , इसमें सारा दोष नगर वासियो  का ही है क्योंकि वो लोग सारे बुराइयों को बर्दाश्त कर रहे हैं।
मैं  भगवान् से यही प्रार्थना करता हूँ कि वो उन्हें सद्बुद्धि दे और प्रशासन को नींद से जगाये और महंतो और ठगों से इस  दिव्य नगर को बचाएं।