काफी संख्या में शहरों को स्मार्ट बनाने की सरकार की ज़ोरदार तैयारी चल रही है , इस क्रम में अद्यतन नाम अमरावती का नाम जुड़ा है। अमरावती आँध्रप्रदेश का ही नहीं बल्कि प्राचीन भारत का भी सुन्दर और नैसर्गिक विविधताओं से संपन्न नगर रहा है , विविधताओं के साथ-साथ यहाँ कला और संस्कृति ने भी विकास हुआ और अद्यतन हो रहा है। स्मार्ट बनने की प्रक्रिया में अमरावती का नाम जुड़ते ही मेरे जैसे सभी नागरिकों का ह्रदय विदीर्ण हो रहा है। क्यूंकि स्मार्ट बनते ही नगर की सारी पुरानी विविधताओं का संरक्षण दुष्कर और चिंतनीय विषय हो गया है , इसके साथ ही स्मार्ट सिटी बनने की प्रक्रिया में अत्यधिक मात्र में कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण किया जायेगा और इसकी प्रक्रिया भी आरम्भ भी हो गयी है। सरकार इसके प्रतिफल में उचित से अधिक धनलाभ और नौकरी और घर का भी आश्वासन दे रही है
किन्तु मेरा मानना है कि नौकरी , घर और धन देने से तात्कालिक रूप से तो प्रयास सफल होते दिखेंगे परन्तु समग्र रूप से दूरगामी प्रभाव भयानक होंगे क्यूंकि कृषि योग्य भूमि का नाश हो जायेगा जैसा की बहुत सारे शहरों के विस्तार में हुआ है , मेरा अपना शहर गोरखपुर भी बीस वर्ष पहले की तुलना में दस गुना बढ़ चुका है और निरन्तर बढ़ ही रहा है और ये सारा विस्तार कृषि योग्य भूमि के विनाश के बाद ही संभव हुआ है।
प्रधानमंत्री जी का सोचना सही हो सकता है कि स्मार्ट नगर में हम सारी सुविधाएँ देंगे और हमारे नागरिक सुरक्षित रूप से विकास करेंगे परन्तु कृषि भूमि के मूल्य पर जो विकास का नाम होगा वो तो अन्ततः भयानक विनाश को
ही आमंत्रित कर रहा है।
प्रधानमंत्री को ही इस विषय में पहल कर के बंजर और ऊसर भूमि को प्रयोग कर के स्मार्ट शहर बनाने की
प्रक्रिया आरम्भ करनी चाहिए जिससे आगे आने वाली पीढ़ियों को खाने के लिए अन्न और पीने के लिए जल मिल सके।
किन्तु मेरा मानना है कि नौकरी , घर और धन देने से तात्कालिक रूप से तो प्रयास सफल होते दिखेंगे परन्तु समग्र रूप से दूरगामी प्रभाव भयानक होंगे क्यूंकि कृषि योग्य भूमि का नाश हो जायेगा जैसा की बहुत सारे शहरों के विस्तार में हुआ है , मेरा अपना शहर गोरखपुर भी बीस वर्ष पहले की तुलना में दस गुना बढ़ चुका है और निरन्तर बढ़ ही रहा है और ये सारा विस्तार कृषि योग्य भूमि के विनाश के बाद ही संभव हुआ है।
प्रधानमंत्री जी का सोचना सही हो सकता है कि स्मार्ट नगर में हम सारी सुविधाएँ देंगे और हमारे नागरिक सुरक्षित रूप से विकास करेंगे परन्तु कृषि भूमि के मूल्य पर जो विकास का नाम होगा वो तो अन्ततः भयानक विनाश को
ही आमंत्रित कर रहा है।
प्रधानमंत्री को ही इस विषय में पहल कर के बंजर और ऊसर भूमि को प्रयोग कर के स्मार्ट शहर बनाने की
प्रक्रिया आरम्भ करनी चाहिए जिससे आगे आने वाली पीढ़ियों को खाने के लिए अन्न और पीने के लिए जल मिल सके।