Thursday, 25 June 2015

murder of journalist jagendra and its result of enquiry

१० जून की घटना का पटाक्षेप आखिर मुख्यमंत्री जी के हस्तक्षेप से हो गया है, मृतक के परिजनों ने सौदेबाज़ी को स्वीकार कर के न्याय की प्रक्रिया को अवरुद्ध कर दिया। अब ये केस बंद होने के कगार पर पहुँच गया होगा क्यूंकि सारे गवाह और सबूतो का कोई अर्थ नहीं रह गया है।  अब सरकार का हर सदस्य कुछ भी कर के पैसे और नौकरी देने के बल पर या अपने जनाधार के बल पर कोई नेता अपने सरकार को बाध्य कर सकता है कि हमारे लिए सौदे बाज़ी करे और सारा सरदर्द अपने सर पर लेकर उनको मुक्त कर दे।
इस प्रक्रिया से ये आधार बन गया है कि सारे निरुद्ध विधायकों और सांसदों को जो किसी भी कारण से जेल में है , उनके लिए भी व्यवस्था कर के उनको भी बाहर ले आए.
मैं ये नहीं जानता कि मंत्री जी कितने दोषी है या नहीं है किन्तु न्याय की प्रक्रिया को अगर चलने दिया जाता और इसके बाद निर्णय होता तो जनता को विश्वास हो जाता कि सरकार न्यायी और समाजकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
मृतक के रिश्तेदारों ने भी कुछ विशेष जल्दबाज़ी कर के सौदेबाज़ी को स्वीकार कर लिया और आगे आने वाली ऐसी घटनाओं में होने वाले प्रतिक्रियाओं को  संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है.

Sunday, 14 June 2015

Saman wadi parti ke karishme

समाजवादी पार्टी के सरकार के तीन वर्ष बीतने जा रहे है और हर वर्ष में अपराधों की संख्या और करने वाले माननीयों के नए नाम भी जुड़ते जा रहे है।  नवीनतम जो घटनाये हुई है उसमे से एक जून को मंत्री राममूर्ति द्वारा पत्रकार जगेंद्र की जला कर हत्या करना और १२ जून को कुछ लोगो द्वारा बहराइच में सूचना अधिकार कार्यकर्ता की पीट पीट कर हत्या एक जघन्य अपराध हुआ है जिसकी निंदा करना भी शर्मनाक है। अपराध और समाजवादी पार्टी एक दूसरे के निकटतम पर्याय बन चुके है।  सरकार के मुखिया और निकटतम सहयोगी मंत्री को बचाने के लिए सारे बेशर्म प्रयास कर रहे हैं , जिसमे उसके परिवार को आर्थिक लालच और परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी का भी  प्रस्ताव दिया गया है.
सरकार की निरंकुशता और ताक़त का अंदाज़ा अब आदमी को पूरी तरह हो गया है , अगर आपके पास समाजवादी पार्टी का झंडा और बिल्ला है तो आपके लिए सब काम आसान  है अन्यथा सब टेढ़ी खीर है।
पता नहीं इन सबसे प्रान्त की जनता को मुक्ति कब मिलेगी।