Sunday, 18 September 2016

Pain in my heart after reading ' Kitne Pakistan'

आज दिनांक १८/०९/२०१६ को मैंने अपनी बहुप्रतीक्षित , प्रिय पुस्तक कमलेश्वर जी  रचित "कितने पाकिस्तान " पढ़ कर समाप्त की है , और उसको पढ़ने के बाद मुझे प्रतीत होता है कि शायद इतनी बढ़िया और विस्तृत विचारों के जो कि  दुनिया के हर हिस्से और हर सदी और समय के हर व्यक्ति और हर घटना का विस्तृत वर्णन और विश्लेषण किसी और पुस्तक में हो , मैंने पढी हो।
कमलेश्वर जी ने आदिकाल से लेकर बांग्लादेश तक के युद्ध तक जितनी भी घटनाए  हुई हैं और उसके लिए जिम्मेदार लोगों और परिस्थितयों को अपने अदालत में बुलाकर जिस तरह जिरह की और वक्त , तहज़ीब , नदी पहाड़ , किसी को भी नहीं छोड़ा और बीच -बीच में अपने वर्तमान की कहानियों के साथ  भी बेहतरीन न्याय किया है.
उन्होंने अपने विश्लेषण में यह भी सिद्ध किया कि हर व्यक्ति के मन में विभाजन कारी शक्तियां सुप्त या जागृत अवस्था में स्थित रहती है , और अवसर पाने पर अपना कार्य कर जातीं है।  इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लगा कि उस दौर के लोगों ने क्या -क्या झेला और आज भी बर्दाश्त कर रहे है।
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद प्रतीत हो रहा है कि , हर व्यक्ति और समाज को इस पुस्तक को बार बार पढ़ना चाहिए , जिससे हम अपना विश्लेषण स्वयं कर सके और समाज में शांति रहे।
धन्यवाद