Sunday, 18 September 2016

Pain in my heart after reading ' Kitne Pakistan'

आज दिनांक १८/०९/२०१६ को मैंने अपनी बहुप्रतीक्षित , प्रिय पुस्तक कमलेश्वर जी  रचित "कितने पाकिस्तान " पढ़ कर समाप्त की है , और उसको पढ़ने के बाद मुझे प्रतीत होता है कि शायद इतनी बढ़िया और विस्तृत विचारों के जो कि  दुनिया के हर हिस्से और हर सदी और समय के हर व्यक्ति और हर घटना का विस्तृत वर्णन और विश्लेषण किसी और पुस्तक में हो , मैंने पढी हो।
कमलेश्वर जी ने आदिकाल से लेकर बांग्लादेश तक के युद्ध तक जितनी भी घटनाए  हुई हैं और उसके लिए जिम्मेदार लोगों और परिस्थितयों को अपने अदालत में बुलाकर जिस तरह जिरह की और वक्त , तहज़ीब , नदी पहाड़ , किसी को भी नहीं छोड़ा और बीच -बीच में अपने वर्तमान की कहानियों के साथ  भी बेहतरीन न्याय किया है.
उन्होंने अपने विश्लेषण में यह भी सिद्ध किया कि हर व्यक्ति के मन में विभाजन कारी शक्तियां सुप्त या जागृत अवस्था में स्थित रहती है , और अवसर पाने पर अपना कार्य कर जातीं है।  इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लगा कि उस दौर के लोगों ने क्या -क्या झेला और आज भी बर्दाश्त कर रहे है।
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद प्रतीत हो रहा है कि , हर व्यक्ति और समाज को इस पुस्तक को बार बार पढ़ना चाहिए , जिससे हम अपना विश्लेषण स्वयं कर सके और समाज में शांति रहे।
धन्यवाद

Saturday, 23 April 2016

मैं आज इस ब्लॉग के माध्यम से आदरणीय प्रधानमंत्री जी एवं डाक तार विभाग के मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूँ कि , किस विधि से जमाकर्ताओं को मानसिक यंत्रणा दी जा रही है और इस पुनीत कार्य में विभाग के कर्मचारी और विभाग के द्वारा नियुक्त एजेंट भी पूरा सहयोग कर रहें है।
आज की सबसे ताज़ा घटना अलीनगर पोस्टऑफिस , गोरखपुर में घटित हुई है।  जमाकर्ता श्रीमती पाठक ने किसी समय अपना एक आवर्ती जमा योजना में खाता खुलवाया और पैसे जमा  करने लगी परन्तु कुछ समय बाद किसी आकस्मिक कारन से पैसे नहीं जमा कर पायी और खाता बंद हो गया।
जब उस पैसे की आवश्यकता पड़ीं तो उनकी पुत्री को पासबुक ले कर एक छोटी सी पर्ची पर लिख कर दे दिया गया कि तुम्हारे खाते की जांच कर के पैसे दिए जायेंगे जबकि सबको ज्ञात है कि सीबीएस प्रणाली लगने के बाद सारी जाँच उसी केंद्र पर हो जाती है और खाते की पूरी कॉपी स्क्रीन पर आ जाती है।  उसके बाद भी उस लड़की को इतने  चक्कर लगवाए कि आज वो वहीं ज़मीन पर ही बैठ गयी कि आज पैसे लेकर जायेंगे या घर जायेंगे ही नहीं।
हर बार उससे कहा जाता था कि आज सर्वर नहीं चल रहा है या आज नकद की दिक्कत है लेकिन उसका भुगतान नहीं हुआ।
आज एक एजेंट के   तथाकथित सहयोग से उसके खाते में पैसा स्थानांतरित कर के एजेंट से उसको पैसे दिलवाए गए। उस नीच एजेंट ने भी उस गरीब से अपने काम का भुगतान माँगा तो लड़की ने कहा कि वो सारे पैसे रख ले और वो अपना काम किसी तरह चला लेगी तब जाकर उस एजेंट ने उसे पैसे दिए और फिर भी फुटकर के पैसे जो कि ८२/- थे रख लिए , सम्भवतः कार्यकर्ताओं के चाय नाश्ते का इंतेज़ाम कर लिया।
ये घटना तो एक बानगी है , एक बड़े शहर के डाकघर और एक पढ़े लिखे उपभोक्ता की , इसी स्थिति को अगर  गावों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो कितनी भयानक परिस्थिति बनती है जहाँ उपभोक्ता अधिकांश निरक्षर होते है और एजेंट के झांसे में आकर  सब कुछ गवां देते  है।  ऐसी घटनाएं एक या दो वर्ष पूर्व हो  भी चुकी है जब उपभोक्ताओं का काफी बड़ी  पैसा एजेंटों ने  ले  लिया और फ़र्ज़ी मोहर लगा कर उपभोक्ताओं को दे दिया गया
जब किसी कार्य वश वो धन निकासी का प्रयास करते थे तो पता चला कि खाता तो खाली पड़ा है। उसके बाद उसके पास आत्महत्या के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं रह जाता है।
       प्रधानमंत्री और सम्बद्ध विभाग के मंत्री से हम सब का आग्रह है कि सभी बचत योजनाओं से एजेंटों को हटाया जाये और कर्मचारियों से आग्रह है कि सभी उपभोक्ताओं का कार्य अपना समझ कर करे जिससे जनता का अपने प्रशासन तंत्र में विश्वास कायम रहे।
 अन्यथा गांधी जी की जो तस्वीर , ग्राहक सेवा  निवदेन के साथ लगी है वो निरर्थक सिद्ध हो जाएगी.

Saturday, 26 March 2016

Agricutural Land v/s Development of Smart Cities

काफी संख्या में शहरों को स्मार्ट बनाने की सरकार की ज़ोरदार तैयारी चल रही है , इस क्रम में अद्यतन नाम  अमरावती का नाम जुड़ा है। अमरावती आँध्रप्रदेश का  ही नहीं बल्कि प्राचीन भारत का भी सुन्दर  और नैसर्गिक विविधताओं से संपन्न नगर रहा है , विविधताओं  के साथ-साथ यहाँ  कला और संस्कृति ने भी विकास हुआ और अद्यतन हो रहा है। स्मार्ट बनने की प्रक्रिया में अमरावती का नाम  जुड़ते ही मेरे जैसे सभी नागरिकों का ह्रदय विदीर्ण हो रहा है।  क्यूंकि स्मार्ट बनते ही नगर की सारी पुरानी विविधताओं का संरक्षण दुष्कर और चिंतनीय विषय हो गया है , इसके साथ ही स्मार्ट सिटी बनने की प्रक्रिया में अत्यधिक मात्र में कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण किया जायेगा और इसकी प्रक्रिया भी आरम्भ भी हो गयी है।  सरकार इसके प्रतिफल में उचित से अधिक धनलाभ और नौकरी और घर का भी आश्वासन दे रही है
किन्तु मेरा मानना है कि नौकरी , घर और धन देने से तात्कालिक रूप से तो प्रयास सफल  होते दिखेंगे परन्तु समग्र रूप से दूरगामी प्रभाव भयानक होंगे क्यूंकि कृषि योग्य भूमि का नाश हो जायेगा जैसा की बहुत सारे शहरों के  विस्तार में हुआ है , मेरा अपना शहर गोरखपुर भी बीस वर्ष पहले की तुलना में दस गुना बढ़ चुका है और निरन्तर बढ़ ही रहा है और ये सारा विस्तार कृषि योग्य भूमि के विनाश के बाद ही संभव हुआ है।
प्रधानमंत्री जी का सोचना सही हो सकता है कि स्मार्ट नगर में हम सारी सुविधाएँ देंगे और हमारे नागरिक सुरक्षित रूप  से विकास करेंगे परन्तु कृषि भूमि के मूल्य पर जो विकास का नाम होगा वो तो अन्ततः भयानक विनाश को
ही आमंत्रित कर रहा है।
प्रधानमंत्री को ही इस विषय में पहल कर के बंजर और ऊसर भूमि को प्रयोग कर के स्मार्ट  शहर बनाने की
प्रक्रिया आरम्भ करनी चाहिए जिससे आगे आने वाली पीढ़ियों को  खाने के लिए अन्न और पीने के लिए जल मिल सके।