Monday, 7 August 2017

Chief Minister Yogi ji and his own city

माननीय
योगी आदित्य नाथ जी गोरखपुर सदर के ०५  बार साँसद रहे है और अब मुख्यमंत्री भी है , परन्तु उनके इतने लम्बे संसदीय कार्यकाल ,  अब मुख्यमंत्रित्व काल में भी गोरखपुर सदर या जिसे नगर क्षेत्र भी कहा जा सकता है , उसमे कोई मूलभूत बदलाव नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री बनते ही उनकी सरकार ने पहला वादा किया कि हम १५ जून तक प्रदेश की सभी सड़को को गड्ढा मुक्त कर देंगे , काम शुरू हुआ और जल्द सार्वजनिक निर्माण विभाग ने हाथ खड़े कर दिए कि उनके पास संसाधन ही नहीं है , और काम बंद हो गया।  थोड़ा सी बारिश में ही शहर को अपने सड़को और नालियों की औकात पता चल गयी। वो तो भला हो भगवान् का कि , बारिश ही रुक गयी और नालियों ने बढ़ना छोड़ दिया वर्ना पता नहीं क्या दशा होती। नगर निगम के कार्यालय के ठीक सामने पार्षद श्री मनीष सिंह का आवास  है
जिसके सामने की नालियों में न जाने कितना कूड़ा है की सारी नालियों का गन्दा पानी सड़क पर है और वहां से दुकानों में घुस कर नर्क जैसा माहौल पैदा हो गया है।
योगी जी ने सांसद रहते हुए बहुत से गावों को गोद लिया था , जंगल औराही भी उनमे से एक है , वहां की सड़को पर पता ही नहीं चलता है कि आप नाली में जा रहे है या सड़क पर है। सारे सड़के बुरी तरह से टूटी है ,और सरकार मेट्रो की परियोजना पर काम करते हुए दिख रही है।  रोज़ अख़बारों में सूचना आ रही है कि यहां डिपो बनेगा वहाँ लाइन बनेगी परन्तु शहर कि चिंता नहीं कि केवल सड़के और नालियां ही ठीक रहे तो जनता आशीर्वाद देते देते थक जाएगी  नगर के वायुपत्तन के एक मात्र मार्ग में रेलवे का नंदानगर  ढाला पड़ता है जिसके  बंद होने के कारण अमूमन लोगो की उड़ाने छूट जाती है और जो लोग  शहर से आते और जाते है उनके लिए भी ढाला एक बड़ा सरदर्द और काम रुकने का कारण है। जनता को वहां तुरंत एक ओवर ब्रिज की आवश्यकता है और वहां इसके लिए पर्याप्त जगह भी है।
मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वहां पर एक ओवरब्रिज अतिशीघ्र बनवाने की कृपा करे , और साथ ही साथ केवल सड़को को सीमेंट से बनवाना प्रारम्भ करवा दे।
सड़को को जीवनकाल भी बढ़ जाएगा , जब लोग सुविधा पूर्वक आना जाना शुरू कर देंगे तो उनको मेट्रो की याद भी नहीं आएगी और सरकार को कई हज़ार करोड़ रुपये बच जायेंगे।
  इस शहर के ज़िम्मेदार नागरिकों से भी अपेक्षा है कि सड़को को कम तोड़े। प्लास्टिक का कम  प्रयोग करे  नालियों से अतिक्रमण न करें। लेकिन यहाँ के नागरिक आये दिन किसी न किसी मंदिर या तीर्थ स्थान पर बड़ा भंडारा करके गरीबों को भोजन कराते है और थर्मोकोल के प्लेट्स का सारा कचरा नालियों में भरने के लिए छोड़ देते है।
इसलिए  आप से यह भी निवेदन है कि थर्मोकोल के प्लेट और गिलास एवं प्लास्टिक के लिफाफों पर शक्ति से प्रतिबन्ध लगाए को क्योंकि लोकतंत्र में जनता प्रतिबन्ध की ही भाषा समझती है।  यद्यपि उसका भी बहुत विरोध होगा और तमाम नेता अपनी तुच्छ नेतागिरी चमकाने के लिए उनका नेतृत्व करना प्रारम्भ कर देंगे। किन्तु जब एक बार नालियों का सारा प्लास्टिक निकल आएगा और नया प्लास्टिक न आने से कचरा कम होगा तो जनता भी उसको स्वीकार कर लेगी और सभी लोग झोला लेकर निकलने के अभ्यस्त हो जायेंगे।
देश कई राज्यों में प्लास्टिक प्रतिबंधित है , और जबकि वहाँ न तो सरकार बहुमत में है और न ही आप जैसा कोई शक्तिशाली मुख्यमंत्री है , जिसकी बात सभी सुने और समर्थन करे।
जनता चाहती है कि सब कार्य समुचित तरीके से हो , शहर में सफाई रहे , नालियों में कचरा न रहे ,गालिया साफ़ रहे ,परन्तु हम  अपने घर का कचरा दूसरे के खाली प्लाट या मकान में डाल कर खुद को सफाई पसंद मान लेते है और सरकार की बुराई शुरू कर देते है।  शहर में ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के सामने , शाहपुर कॉलोनी में , मिर्ज़ापुर बंधे पर, हठी माई मंदिर के सामने , महेवा सब्ज़ी मंडी में कूड़े का भयानक अम्बार है। ये सब अम्बार जनता की भयानक भूल और सरकार के उपेक्षा का नतीजा है। जिसका दुष्परिणाम हम सभी विभिन्न भयंकर बीमारियों के रूप में भुगत रहे हैं।
अंत में निवेदन है कि गोरखपुर नगर ,  गोरखनाथ मंदिर और योगी जी  लोग एक दूसरे का पर्यायवाची मानते है , और ये चर्चा पूरी दुनिया में है , इसलिए इस शहर की गरिमा को उन्नत करने और  बनाये रखने के लिए हम सभी नागरिकों और आप को दुस्तर प्रयास करने होगा।