Saturday, 23 April 2016

मैं आज इस ब्लॉग के माध्यम से आदरणीय प्रधानमंत्री जी एवं डाक तार विभाग के मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूँ कि , किस विधि से जमाकर्ताओं को मानसिक यंत्रणा दी जा रही है और इस पुनीत कार्य में विभाग के कर्मचारी और विभाग के द्वारा नियुक्त एजेंट भी पूरा सहयोग कर रहें है।
आज की सबसे ताज़ा घटना अलीनगर पोस्टऑफिस , गोरखपुर में घटित हुई है।  जमाकर्ता श्रीमती पाठक ने किसी समय अपना एक आवर्ती जमा योजना में खाता खुलवाया और पैसे जमा  करने लगी परन्तु कुछ समय बाद किसी आकस्मिक कारन से पैसे नहीं जमा कर पायी और खाता बंद हो गया।
जब उस पैसे की आवश्यकता पड़ीं तो उनकी पुत्री को पासबुक ले कर एक छोटी सी पर्ची पर लिख कर दे दिया गया कि तुम्हारे खाते की जांच कर के पैसे दिए जायेंगे जबकि सबको ज्ञात है कि सीबीएस प्रणाली लगने के बाद सारी जाँच उसी केंद्र पर हो जाती है और खाते की पूरी कॉपी स्क्रीन पर आ जाती है।  उसके बाद भी उस लड़की को इतने  चक्कर लगवाए कि आज वो वहीं ज़मीन पर ही बैठ गयी कि आज पैसे लेकर जायेंगे या घर जायेंगे ही नहीं।
हर बार उससे कहा जाता था कि आज सर्वर नहीं चल रहा है या आज नकद की दिक्कत है लेकिन उसका भुगतान नहीं हुआ।
आज एक एजेंट के   तथाकथित सहयोग से उसके खाते में पैसा स्थानांतरित कर के एजेंट से उसको पैसे दिलवाए गए। उस नीच एजेंट ने भी उस गरीब से अपने काम का भुगतान माँगा तो लड़की ने कहा कि वो सारे पैसे रख ले और वो अपना काम किसी तरह चला लेगी तब जाकर उस एजेंट ने उसे पैसे दिए और फिर भी फुटकर के पैसे जो कि ८२/- थे रख लिए , सम्भवतः कार्यकर्ताओं के चाय नाश्ते का इंतेज़ाम कर लिया।
ये घटना तो एक बानगी है , एक बड़े शहर के डाकघर और एक पढ़े लिखे उपभोक्ता की , इसी स्थिति को अगर  गावों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो कितनी भयानक परिस्थिति बनती है जहाँ उपभोक्ता अधिकांश निरक्षर होते है और एजेंट के झांसे में आकर  सब कुछ गवां देते  है।  ऐसी घटनाएं एक या दो वर्ष पूर्व हो  भी चुकी है जब उपभोक्ताओं का काफी बड़ी  पैसा एजेंटों ने  ले  लिया और फ़र्ज़ी मोहर लगा कर उपभोक्ताओं को दे दिया गया
जब किसी कार्य वश वो धन निकासी का प्रयास करते थे तो पता चला कि खाता तो खाली पड़ा है। उसके बाद उसके पास आत्महत्या के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं रह जाता है।
       प्रधानमंत्री और सम्बद्ध विभाग के मंत्री से हम सब का आग्रह है कि सभी बचत योजनाओं से एजेंटों को हटाया जाये और कर्मचारियों से आग्रह है कि सभी उपभोक्ताओं का कार्य अपना समझ कर करे जिससे जनता का अपने प्रशासन तंत्र में विश्वास कायम रहे।
 अन्यथा गांधी जी की जो तस्वीर , ग्राहक सेवा  निवदेन के साथ लगी है वो निरर्थक सिद्ध हो जाएगी.