विगत ५ जून को हमने कहानियों पर चर्चा की थी उसी सन्दर्भ में मुझे एक कहानी याद आती है जिसे श्री भीष्म साहनी ने अपने बड़े भाई श्री बलराज साहनी से सुनी थी जिसका शीर्षक है " लिहाफ "
कहानी कुछ इस प्रकार है कि , " जाड़े की एक सर्द रात में एक राही एक सराय में रुकने के लिए अपने घोड़ा गाड़ी से उतरा और सराय के
कहानी कुछ इस प्रकार है कि , " जाड़े की एक सर्द रात में एक राही एक सराय में रुकने के लिए अपने घोड़ा गाड़ी से उतरा और सराय के
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