Thursday, 5 June 2014


 कहानियां 

आज हम लोग कहानियों के बारे में बाते करेंगे , समाज के निर्माण से लेकर आज तक के आधुनिक काल में भी कहानियों का सृजन और कथन और कथोपकथन निरंतर हो रहा है , समाज के विभिन्न धाराओं और वर्गों को जोड़े रखने के कार्य में कहानियों का अभूतपूर्व योगदान रहा है।  नानी , दादी की कहानियों से लेकर सम्मानित लेखकों , अनगढ़ समाज की कहानियों , प्रत्येक धर्म की कहानियों ने समाज के उत्थान  में महती भूमिका निभायी है।  समाज ने इन कहानियों से बहुत कुछ सीखा और सिखाया है, परन्तु ये सीखना , सिखाना उन्ही लोगो पर कार्य करता है जो उन कहानियों से प्रेरणा लेते है।  यदि कहानियों को सुनकर अनसुना कर दे तो उनका कोई अर्थ नहीं निकलता है और प्रेरणा लेने वाले की ज़िन्दगी बदल देती है.
धार्मिक कहानियों से प्रेरणा ले कर लाखों प्रवासियों  ने राम , कृष्णा का नाम लेते हुए जिंदगी की सारी कठिनाइयों को पार कर लिया , आज भी उन सारे देशों में भारतीयों के सहनशीलता और धार्मिक   अवलम्बन  की कहानियां कही और सुनी जाती है और लोग इनसे प्रेरणा लेते है

कहानी का मूल्य , उसकी  मूल शिक्षा और संवेदना के स्तर से निर्धारित होता है. संवेदना के स्तर पर जो कहानियां श्रेष्ठ होती है उन्ही का प्रभाव समाज पर दीर्घ काल तक सुढृढ़ रहता है।
समाज सदैव ये अपेक्षा रखता है कि उसको दिशा निर्देश देने हेतु कहानियों का सृजन होता रहे और पुरानी कहानियों का भी वाचन भी प्रचलित रहे.






  


  










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