Tuesday, 31 March 2015

Sayunkta rash tar sangha ki upyogita

मुझे या किसी भी नागरिक को यह समझ में नहीं आता होगा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना को आज ७० वर्ष हो गए है, परन्तु उसकी स्थापना का उद्देश्य कितना पूर्ण हो रहा है या ये केवल ये अपने संस्थापकों के लाभ के लिए ही उपलब्ध है।
 विश्व का हर आम नागरिक ये देख चुका है कि संसार के कतिपय राष्ट्रों के हित के लिए ही ये संस्था कार्य करती रही है।  विशेष तौर पर सुरक्षा परिषद की कार्य प्रणाली तो एकतरफा ही दिखती है।
जो भी देश ताकतवर है वे केवल सूचना देकर ही युद्ध प्रारम्भ कर देते है। ईरान - इराक युद्ध से लेकर अब तक के किसी भी  गृह युद्ध अथवा बाहरी आक्रमण को ये संगठन रोक नहीं पाया है। आज पूरे मुस्लिम राष्ट्रों में अशांति है नरसंहार हो रहे है उसके मूल में एक ही कारण है कि संघ के दंड का भय किसी को नहीं रह गया है। सयुंक्त राष्ट्र संघ केवल कुछ देशो का आज्ञापालक ही रह गया है। इस दशा में शांति स्थापना असंभव है ये नरसंहार यों ही चलते रहेंगे और अति शीघ्र ये विश्व के शेष देशो में भी फ़ैल जायेगा। 

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