हम सभी कुछ दिनों से सारे प्रचार माध्यमो से ये समाचार पा रहे है की जम्मू कश्मीर के माननीय मुख्यमंत्री श्री सईद साहेब ने कितने उलझाने वाले बयान दिए और अपने पहले ही सम्बोधन में ही अपने सेना और प्रशासन को धन्यवाद देने के स्थान पर हुर्रियत और अन्य अलगाववादी ताक़तों के साथ साथ पाकिस्तान को भी धन्यवाद दिया . इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने पुलिस महानिदेशक को अपने कार्यालय पर बुलाकर सभी विवादस्पद कैदियों को छोड़ने का आदेश दिया और पहला कैदी मसर्रत आलम को रिहा किया गया।
इन सब घटनाओं से मुझ जैसे आम नागरिक को जरा भी आश्चर्य नहीं होता है , क्यूंकि हम सभी मुफ्ती साहब और उनके परिवार के आदतों को जानते है और हमे ये भी याद है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के सरकार में गृहमंत्री रहते हुए तथाकथित रूप से अपनी पुत्री के अपहरण का नाटक रच कर अज़हर मसूद और हाफिज सईद जैसे चार आतंकवादियों को छोड़ दिया।
भारतीय जनता पार्टी को गठबंधन करने से पहले ये घटनाएँ क्यों नहीं याद रही , क्यों उन्होंने शासन में आने के लिये ऐसी ज़ल्दबाज़ी की, कि अब पत्रकारों के सवालो का जबाब देना मुश्किल हो रहा है। ये सारे लोग जो सत्ता में है उन्हें अच्छी तरह याद होगा क़ि भाजपा उस समय भी सत्ता में भागीदार थी।
अब भाजपा को इस दलदल से कैसे निबटना है , ये सोचना होगा।
इन सब घटनाओं से मुझ जैसे आम नागरिक को जरा भी आश्चर्य नहीं होता है , क्यूंकि हम सभी मुफ्ती साहब और उनके परिवार के आदतों को जानते है और हमे ये भी याद है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के सरकार में गृहमंत्री रहते हुए तथाकथित रूप से अपनी पुत्री के अपहरण का नाटक रच कर अज़हर मसूद और हाफिज सईद जैसे चार आतंकवादियों को छोड़ दिया।
भारतीय जनता पार्टी को गठबंधन करने से पहले ये घटनाएँ क्यों नहीं याद रही , क्यों उन्होंने शासन में आने के लिये ऐसी ज़ल्दबाज़ी की, कि अब पत्रकारों के सवालो का जबाब देना मुश्किल हो रहा है। ये सारे लोग जो सत्ता में है उन्हें अच्छी तरह याद होगा क़ि भाजपा उस समय भी सत्ता में भागीदार थी।
अब भाजपा को इस दलदल से कैसे निबटना है , ये सोचना होगा।
No comments:
Post a Comment