Friday, 13 December 2013

आज कल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों के मानसिक संतुलन पर अरविन्द और उनके आप का भय सर चढ़ कर बोल रहा है , इसी कारण कभी विदेश मंत्री कांग्रेस अध्यक्ष को राहुल की माँ के साथ अपनी माँ और फिर सारे देश की माँ बताते है , कभी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल सारे महत्वपूर्ण कार्यो को छोड़ कर समलैंगिकता पर बहस में लग जाते हैं , जबकि कल ही न्यायालय ने इसे गैर कानूनी और असंवैधानिक और साथ ही देश के सामाजिक संरचना के विरुद्ध बताया है, वैसे भी अदालत कहे या न कहे समलैंगिकता हमारे समाज के मान्यताओं में कहीं भी सम्मिलित नहीं है।  राहुल को चाहिए कि अब वे अपने लोक सभा क्षेत्र पर ध्यान दे और अपनी माँ के स्वास्थय और लोक सभा क्षेत्र पर निगाह रखे जिससे वो भी सीट कोई कब्ज़ा न कर ले।  देश में विचार करने लायक बहुत सारी परेशानिया और पेचीदिगियां है।  उन पर चिंतन कर करके सही विचार रखना चाहिए। सलमान खुर्शीद ने चापलूसी की पराकाष्ठा पर कर ली है ,जिससे हो सकता है कि आगे के बचे कार्यकाल में उनको कोई और पद भी मिल जाये और वे कुछ अपना अतिरिक्त भला कर सके।  अन्यथा विदेश मंत्री स्तर के पास अनगिनत समस्याए और काम होते है , और सारे विश्व के कारगुजारियों और घटनाओं पर पैनी नज़र रखनी होती है , जो कार्य इस समय एकदम नहीं होता प्रतीत होता है।  हमारे देश की कोई बात या घटना पर कोई ध्यान नहीं देता है। सारे देश के भीतर जासूसों का जाल बिछा जिसके बारे में अमेरिका स्वयं  स्वीकार कर रहा है।  सारे देश के आम से लेकर खास व्यक्तियों तक कि सारी सूचनाये जा रही है।
इस लिए सारे आम आदमियो की ओर से मेरी कांग्रेस पार्टी और सरकार से अनुरोध है कि वे अपने मूल काम पर ही चिंतन करे और न्यायालय और माँ के मुद्दे छोड़ दे , जनता स्वयं तय कर लेगी।

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