Thursday, 26 February 2015

हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कुछ दिन पहले छात्रों को अपने रेडियो सम्बोधन में कहा कि छात्रों को परीक्षा  का आनंद लेना चाहिये और हमारी परीक्षा प्रणाली भी ऐसी हो कि अध्यापक , परीक्षक और इससे जुड़े सभी पक्ष इसका आनंद ले और परीक्षाओं को महोत्सव की तरह मनाये , परन्तु क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था इसके लिए तैयार है जो कि केवल अंको पर आधारित है और वर्षांत के अंको के योग पर ही छात्र के योग्यता का आकलन कर लिया जाता है भले ही छात्र विशेष परीक्षा अवधि में बीमार  पड़ जाये या उसके या उसके परिवार में कोई आपदा आ जाये  .  ऐसे में वो छात्र योग्यतम होते हुए भी अयोग्य सिद्ध कर दिया जाता है और उसका वर्ष भर का परिश्रम व्यर्थ हो जाता है। 
अतः सभी छात्रों की ओर से हमारी प्रधानमंत्री और मानव संसाधन मंत्री जी से निवेदन है कि एक ऐसी व्यवस्था को अपने कार्यकाल में ही स्थापित करे कि जिससे छात्रों के कार्यों का साप्ताहिक मूल्याङ्कन किया जा सके और समय समय पर अभिवावकों से संपर्क कर के उनके बच्चो के बारे में विस्तार से बताया जाये , जिससे उन्हें भी सही स्थिति की जानकारी हो सके और शिक्षक के साथ मिल कर सही कदम उठा सके. 
छात्रों/ छात्राओं के सही रूचि का  विश्लेषण कर के सही दिशा निर्देश दिया जा सके और किसी को भी भविष्य में अपने कार्यो से असंतुष्टि न हो.

No comments:

Post a Comment