भारत के राजनीतिक एवं कूटनीतिक कौशल का निरंतर ह्रास हो रहा है , हमारे प्रधान मंत्री की आवाज़ किसी भी भाषण और सेमिनार में सुनाई नहीं देती है। वे इतना धीरे और अतिरिक्त सावधानी का प्रयोग करते है कि
अन्य देश के प्रतिनिधि उसको गम्भीरता से नहीं सुनते है या प्रतिक्रिया देते है। अमरीका के ईरान सम्बंधित प्रतिबंधो से घबरा कर हमने ईरान से व्यापारिक सम्बन्ध स्थगित कर दिया और अमरीका अब अपने व्यापारिक हित के लिए रूस , चीन और फ्रांस के साथ गठजोड़ बना कर ईरान से समझौता करने को तैयार है , इस कार्य के लिए न ही उसने अपने पुराने परम मित्र इजराइल से पूछा और न ही अपने नए सहयोगी भारत से सलाह ली। अब वह भारत पर कूटनीतिक दबाब बनाएगा कि हम भी ईरान से व्यापारिक समझौता करे.
कोई भी राष्ट्र अगर अपनी बात को अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर सही ढंग से और ज़ोरदार ढंग से नहीं रखेगा उसको दबाब में ही समझौता करना पड़ेगा।
अन्य देश के प्रतिनिधि उसको गम्भीरता से नहीं सुनते है या प्रतिक्रिया देते है। अमरीका के ईरान सम्बंधित प्रतिबंधो से घबरा कर हमने ईरान से व्यापारिक सम्बन्ध स्थगित कर दिया और अमरीका अब अपने व्यापारिक हित के लिए रूस , चीन और फ्रांस के साथ गठजोड़ बना कर ईरान से समझौता करने को तैयार है , इस कार्य के लिए न ही उसने अपने पुराने परम मित्र इजराइल से पूछा और न ही अपने नए सहयोगी भारत से सलाह ली। अब वह भारत पर कूटनीतिक दबाब बनाएगा कि हम भी ईरान से व्यापारिक समझौता करे.
कोई भी राष्ट्र अगर अपनी बात को अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर सही ढंग से और ज़ोरदार ढंग से नहीं रखेगा उसको दबाब में ही समझौता करना पड़ेगा।
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